

"केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सिलीगुड़ी दौरे का मुख्य एजेंडा चिकन नेक कॉरिडोर की सुरक्षा को मजबूत करना है, जो भारत के मुख्य भूभाग को पूर्वोत्तर से जोड़ने वाली एक रणनीतिक कड़ी है।"
देश की सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे 'चिकन नेक' के नाम से जाना जाता है, पर अब केंद्र सरकार की नजरें और अधिक गहरी हो गई हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आगामी सिलीगुड़ी दौरा इसी रणनीतिक महत्व को दर्शाता है।
अमित शाह 21 अगस्त को SSB फ्रंटियर मुख्यालय पहुंचेंगे। अपने दौरे के दौरान, वे सीमा सुरक्षा से जुड़ी कई प्रमुख परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे और तैनात जवानों के साथ संवाद करेंगे। इसके बाद 22 अगस्त को वे एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें सीमा सुरक्षा को लेकर एक नया ब्लूप्रिंट तैयार किया जाएगा।
चिकन नेक क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
यह कॉरिडोर भारत के मुख्य भूभाग को पूर्वोत्तर (North-East) से जोड़ने वाला एकमात्र संकरा मार्ग है। इसकी भौगोलिक स्थिति बेहद संवेदनशील है क्योंकि यह नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के करीब स्थित है। वहीं, उत्तर में चीन के तिब्बत और चुम्बी वैली की निकटता इसे सैन्य दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। किसी भी प्रकार की घुसपैठ, तस्करी या सीमा विवाद की स्थिति में यह गलियारा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय पर जोर
अमित शाह के इस दौरे में नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से लगी सीमाओं की सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा की जाएगी। बैठक में BSF, SSB, खुफिया एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर चर्चा होगी। सरकार का मुख्य लक्ष्य सीमा पर नई तकनीक, बेहतर बुनियादी ढांचे और निगरानी क्षमता को और अधिक मजबूत बनाना है।
यह दौरा केवल एक प्रशासनिक यात्रा नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर की सुरक्षा और कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजरें 22 अगस्त की उस उच्च-स्तरीय बैठक पर टिकी हैं, जहां सुरक्षा रणनीति को लेकर बड़े निर्णय लिए जा सकते हैं।





