

"रांची सहित देशभर में चीनी की कीमतों में 40 फीसदी की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एथेनॉल उत्पादन और स्टॉक की कमी के चलते आम जनता का घरेलू बजट बिगड़ गया है।"
रांची और देश के अन्य हिस्सों में बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की कमर तोड़ दी है। खुदरा बाजार में चीनी की कीमत अब ₹70 प्रति किलो के स्तर को पार कर गई है, जो महज तीन महीने पहले करीब 48 रुपये थी। कीमतों में लगभग 40 फीसदी का यह उछाल सीधे तौर पर घरेलू बजट को प्रभावित कर रहा है।
महंगाई का असर केवल चीनी तक सीमित नहीं है; गुड़ की कीमतों में 24 फीसदी की वृद्धि हुई है, जबकि आटा और चावल जैसे आवश्यक खाद्य पदार्थों के दाम भी बढ़ गए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तेजी के पीछे एथेनॉल उत्पादन का बड़ा हाथ है। 2025-26 सीजन के दौरान गन्ने का एक बड़ा हिस्सा एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल किया गया, जिससे चीनी के स्टॉक में भारी गिरावट आई है। मिलों के पास शुरुआती स्टॉक 47 लाख टन से घटकर 32 लाख टन रह गया है।
इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। साथ ही, जमाखोरी रोकने के लिए कारोबारियों पर स्टॉक लिमिट भी लागू कर दी गई है। बाजार विशेषज्ञों को उम्मीद है कि नई पेराई सत्र और सरकारी हस्तक्षेप के बाद जल्द ही कीमतों में राहत मिल सकती है।





