

"दिल्ली में 50 हजार टन चावल के कथित आवंटन घोटाले की जांच अब CBI के दायरे में है, जिसमें FCI को करोड़ों का नुकसान पहुँचाने और निजी कंपनियों के गठजोड़ का पर्दाफाश हुआ है।"
दिल्ली में रियायती दर पर चावल आवंटन से जुड़ा कथित घोटाला अब एक बड़ी कानूनी पेचीदगी में बदल चुका है। सीबीआई की एफआईआर के मुताबिक, 50,645 मीट्रिक टन चावल के उठाव में गंभीर अनियमिताएं बरती गईं, जिससे भारतीय खाद्य निगम (FCI) को करीब 28.87 करोड़ रुपये का संभावित नुकसान हुआ है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि किस तरह नियमों को ताक पर रखकर निजी कंपनियों को लाभ पहुँचाया गया।
मामले की शुरुआत जनवरी 2026 में हुई, जब एनईआरएएमएसी (NERAMAC) ने दिल्ली के जरूरतमंदों के नाम पर रियायती दर पर चावल आवंटन का प्रस्ताव रखा। आरोप है कि एनईआरएएमएसी के पास बिना ई-नीलामी के चावल लेने की पात्रता नहीं थी, इसके बावजूद उन्हें 23,200 रुपये प्रति मीट्रिक टन की दर से अनाज आवंटित कर दिया गया, जबकि बाजार की आरक्षित कीमत काफी अधिक थी। इस प्रक्रिया ने आवंटन नीति की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
सीबीआई की जांच में यह बात भी सामने आई है कि सरकारी आवंटन का फायदा उठाने के लिए तीन निजी संस्थाओं को चैनल पार्टनर के रूप में जोड़ा गया। आरोप है कि चावल जरूरतमंदों तक पहुँचने के बजाय सीधे इन निजी व्यापारियों के हाथों में चला गया। विजिलेंस रिपोर्ट के जरिए शुरू हुई यह जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि फर्जी दस्तावेजों और बैकडेटेड पत्रों का सहारा लेकर इस पूरे नेटवर्क को कैसे संचालित किया गया।
वर्तमान में सीबीआई की जांच उन तमाम पहलुओं को खंगाल रही है, जो चावल के अंतिम वितरण से जुड़े हैं। एजेंसी यह भी जांच रही है कि भुगतान किस माध्यम से हुआ और कथित वितरण के रिकॉर्ड कितने वास्तविक हैं। 28.87 करोड़ का यह आंकड़ा असल में उस नुकसान को दर्शाता है जो ई-नीलामी न होने के कारण सरकारी खजाने को हुआ है। अब देखना यह है कि इस आपराधिक साजिश में शामिल अधिकारियों और निजी कंपनियों पर क्या कार्रवाई होती है।





