

"चार दशकों तक झारखंड और ओडिशा में आतंक का पर्याय रहे माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ सागर दा को सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार कर लिया है।"
झारखंड और ओडिशा के नक्सल प्रभावित इलाकों में पिछले चार दशकों से दहशत का दूसरा नाम रहे भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेता मिसिर बेसरा उर्फ सागर दा को आखिरकार सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तार कर लिया है। इस बड़ी कार्रवाई में उसके साथ मोछू और गौरव को भी हिरासत में लिया गया है। इसे सुरक्षा बलों के लिए हाल के वर्षों की सबसे बड़ी नक्सल विरोधी सफलता माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, मिसिर बेसरा संगठन की पोलित ब्यूरो, केंद्रीय कमेटी और ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो का अहम सदस्य था। वह कोल्हान और सारंडा के जंगलों में माओवादी नेटवर्क को मजबूती देने और सुरक्षा बलों पर हमलों की रणनीति बनाने का मास्टरमाइंड था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, उसके खिलाफ वर्ष 2010 से 2026 के बीच हत्या, आईईडी विस्फोट और लेवी वसूली जैसे 141 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि बेसरा की गिरफ्तारी से संगठन के वित्तीय स्रोतों, हथियारों की आपूर्ति और कैडर नेटवर्क के कई राज खुलेंगे। कुछ समय पूर्व उसने आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया था, लेकिन अब कानून की गिरफ्त में आने के बाद माओवादी संगठन की कमर टूटनी तय मानी जा रही है।





