

"बिहार के बाद अब झारखंड के गढ़वा में करोड़ों की लागत से बना पुल उद्घाटन से पहले ही जर्जर हो गया। ग्रामीण निर्माण की गुणवत्ता और योजना की उपयोगिता पर सवाल उठा रहे हैं।"
बिहार के चर्चित ‘धान के खेत में पुल’ विवाद के बाद अब झारखंड के गढ़वा जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत करीब 1.81 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया एक पुल पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो गया है।
रमकंडा प्रखंड के पतसर गांव में बने इस पुल के एप्रोच पथ का गार्डवाल ढह गया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वे निर्माण के समय से ही इसका विरोध कर रहे थे, क्योंकि वहां इस स्तर के पुल की कोई आवश्यकता ही नहीं थी। ग्रामीणों के अनुसार, छोटी पुलिया से काम चल सकता था, लेकिन अनावश्यक रूप से करोड़ों खर्च कर ऊंचा पुल बना दिया गया, जो अब उनके लिए मुसीबत बन गया है।
गांव के सरपंच अमित मुंडा ने निर्माण कार्य में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारियों को तकनीकी खामियों की शिकायत बार-बार की गई थी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। पहली बारिश ने सरकारी दावों और निर्माण की गुणवत्ता की पोल खोल दी है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या दोषी एजेंसी पर कोई गाज गिरती है।





