

"झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली है। मिसिर बेसरा के करीबी बॉडीगार्ड समेत 18 उग्रवादियों ने हथियार डालकर मुख्यधारा में वापसी की है।"
झारखंड में चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियान को एक ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। राज्य में सक्रिय कुख्यात माओवादी कमांडर मिसिर बेसरा के करीबी बॉडीगार्ड शनिचरवा समेत कुल 18 उग्रवादियों ने सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है।
आत्मसमर्पण के दौरान इन नक्सलियों ने AK-47 राइफल समेत 12 से अधिक अत्याधुनिक हथियार पुलिस को सौंपे हैं। यह कार्रवाई सुरक्षा बलों के लगातार दबाव और जंगलों में चलाए जा रहे सघन तलाशी अभियानों का परिणाम है।
खुफिया सूत्रों के अनुसार, पश्चिमी सिंहभूम के टोंटो थाना क्षेत्र में लगातार मिल रही चुनौतियों और रसद आपूर्ति ठप होने के कारण माओवादियों का मनोबल टूट रहा है। हालांकि, शीर्ष नक्सली मिसिर बेसरा और 1 करोड़ के इनामी असीम मंडल अभी भी सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष ऑपरेशन जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में उग्रवादियों का आत्मसमर्पण झारखंड में माओवादी संगठन की कमर तोड़ने के समान है। राज्य प्रशासन ने दावा किया है कि आने वाले दिनों में और भी कई सक्रिय नक्सली मुख्यधारा में शामिल हो सकते हैं।





